Tuesday, 1 March 2016

कुंडली का नवम भाव

कुंडली का नवम भाव

जन्मकुंडली का नौवां घर सर्वाधिक शुभ घरों में गिना जाता है | इस घर का अपना विशेष महत्व है | मैंने जीवन में इस घर का प्रभाव स्वयं अनुभव करके देखा है | अक्सर हम राजयोग के बारे में बात करते हैं | हर व्यक्ति की कुंडली में राजयोग और दरिद्र योग मिल जायेंगे | हर योग की कुछ समय अवधि रहती है | दो तीन साल से लेकर पांच छह साल तक ही ये योग प्रभावशाली रहते हैं | जिस राजयोग के विषय में मैं सोच रहा हूँ अलग है | नवम भाव से बनने वाला योग पूरे जीवन में प्रभाव कारी रहता है |

कुछ लोगों को आगे बढ़ने के अवसर ही नहीं मिल पाते और कुछ लोग अवसर मिलते ही बहुत दूर निकल जाते हैं | बदकिस्मती जो जीवन बदल दे इसी घर की देन होती है | खुशकिस्मती जो अगली पीढ़ियों के लिए भी रास्ता साफ़ कर दे नवम भाव का प्रबल होना दर्शाती है |

मनपसंद जीवनसाथी पाने की आस में पूरा जीवन गुजर जाता है उसके साथ जिसे कभी पसंद किया ही नहीं |  जिन्दगी के साथ समझौता कर लेना या यह मान लेना कि यही नसीब था इन घटनाओं के लिए नवम भाव ही उत्तरदायी है |

आस लगाकर बैठे हजारों हजार लोग भाग्य के पीछे भागते रहते हैं और यह भी सच है कि इस दौड़ में हम सब हैं | प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हर कोई भाग्य की और देख रहा है | किस्मत का यह ताना बाना अपने आप में विचित्र है | भाग्य को समझ पाना आसान नहीं परन्तु जन्मकुंडली के द्वारा एक कोशिश की जा सकती है | तो आइये जानते हैं कैसे आपकी जन्मकुंडली का नवम भाव आपके जीवन को प्रभावित करता है |

नवम भाव और राज योग

नवम भाव किस्मत का है | यहाँ बैठे ग्रह आपके भाग्य को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं | यदि यहाँ कोई भी ग्रह न हो तो भी यहाँ स्थित राशी के स्वामी को देखा जाता है | नवम भाव भाग्य का और दशम भाव कर्म का है | जब इन दोनों स्थानों के ग्रह आपस में किसी भी प्रकार का सम्बन्ध रखते हैं तब राजयोग की उत्पत्ति होती है | राजयोग में साधारण स्थिति में व्यक्ति सरकारी नौकरी प्राप्त करता है | नवम और दशम भाव का आपस में जितना गहरा सम्बन्ध होगा उतना ही अधिक बड़ा राज व्यक्ति भोगेगा | मंत्री, राजनेता, अध्यक्ष आदि राजनीतिक व्यक्तियों की कुंडली में यह योग होना स्वाभाविक ही है |

नवम भाव और दुर्भाग्य

यदि नवम भाव का स्वामी ग्रह सूर्य के साथ १० डिग्री के बीच में हो तो निस्संदेह व्यक्ति भाग्यहीन होता है | यदि नवमेश नीच राशी में हो तो व्यक्ति चाहे करोडपति क्यों न हो एक न एक दिन उसे सड़क पर आना पड़ ही जाता है | यदि नवमेश १२वे भाव में हो तो व्यक्ति का भाग्य अपने देश में नहीं चमकता | विदेश में जाकर वहां कष्ट उठाकर जीना पड़ता है | उसकी यही मेहनत उसके भाग्य का निर्माण करती है |

नवम भाव का स्वामी बलवान हो या निर्बल, उसकी दशा अन्तर्दशा में व्यक्ति को अवसर खूब मिलते हैं | यदि नवमेश अच्छी स्थिति में होगा तो व्यक्ति अवसर का लाभ उठा पायेगा | अन्यथा अवसर पर अवसर ऐसे ही निकल जाते हैं जैसे मुट्ठी में से रेत |

पाप ग्रह इस स्थान में बैठकर भाग्य की हानि करते हैं और शुभ ग्रह मुसीबतों से बचाते हैं | इस स्थान पर बुध, शुक्र, चन्द्र और गुरु का होना व्यक्ति के उज्ज्वल भविष्य को दर्शाता है | मंगल, शनि, राहू और केतु इस स्थान में बैठकर व्यक्ति को दुर्भाग्य के अवसर प्रदान करते हैं | सूर्य का यहाँ होना निस्संदेह एक बहुत बड़ा राजयोग है | सूर्य स्वयं ग्रहों का राजा है और जब राजा ही भाग्य स्थान में बैठ जाए तो राजयोग स्पष्ट हो जाता है |

कोई भी ग्रह चाहे वह पाप ग्रह मंगल, शनि ही क्यों न हों, इस स्थान में यदि अपनी राशी में हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यशाली हो जाता है | पाप ग्रहों से अंतर केवल इतना पड़ता है कि उसके अशुभ कर्मों में भाग्य उसका साथ देता है |

दुर्भाग्य को नष्ट करने के उपाय

चाहे आपको ज्योतिष का ज्ञान हो या न हो, अपने भाग्य की स्थिति का ज्ञान तो हर व्यक्ति को होता है | अब यदि दुर्भाग्य पीछा न छोड़ रहा हो तो क्या ऐसा करें कि दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाए |

यह संभव है क्योंकि नवम भाव का स्वामी मारक नहीं होता इसलिए उसका रत्न अधिकतर फायदा ही देता है | नवम भाव के उपाय हमेशा काम करते हैं | यदि नवमेश का गहराई से अध्ययन करके उसके बलाबल का पता लगाया जाये तो आसान से उपायों से सौभाग्य को आमंत्रित किया जा सकता है |

नवम भाव धर्म का भाव है | धर्म कर्म में व्यक्ति की रूचि तभी होगी जब यह स्थान शुभ ग्रहों से विभूषित होगा | यदि यहाँ पाप ग्रहों का साया हो तो व्यक्ति नास्तिक होता है | बुद्धिजीवी होने के फायदे हों न हों परन्तु धर्म कर्म के प्रभाव को समझना बुद्धिजीवियों के वश की बात नहीं | इसीलिए वे प्रकृति के इस वरदान से वंचित रह जाते हैं |

धर्म के रास्ते में चमत्कार अक्सर देखे सुने जाते रहे हैं परन्तु धर्म में रूचि ही नहीं होगी तो क्या लाभ | मैं बात कर रहा हूँ उन मन्त्रों की जो व्यक्ति के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखते हैं | नीचे लिखे मन्त्र से आप भी अपने दुर्भाग्य को नष्ट करके उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं |

देहि में सौभाग्यमारोग्यं देहि में परम सुखं
धनं देहि, रूपम देहि यशो देहि द्विषो जहि

उपरोक्त मन्त्र से केवल २१ दिन के भीतर आप अपने भीतर एक ऊर्जा को अनुभव करने लगेंगे | यदि इस मन्त्र को गुरु के मुख से लिया जाए तो और भी कम समय में अधिक फल प्राप्त होता है |

केवल इस एक मन्त्र में धन, रूप और ऐश्वर्य प्रदान करने की क्षमता है | दुर्भाग्य में क्षण सौभाग्य में बदल जाते हैं | केवल उच्चारण सटीक व् सौम्य होना आवश्यक है |

मोती और मरिक्य रत्नके बारे में


🔶अब हम मोती रत्नके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे......

♦मेष राशि :--इस राशि के व्यक्ति यदि मोती धारण करतेहै तो उन्हें मानसिक शान्ति, विद्या सुख, गृह सुख और मातृ सुख का भरपूर लाभ मिलता है. यदि मोती को मंगल के रत्न मूंगा के साथ धारण किया जाये तो विशेष धन का लाभ होने लगता है.

♦वृष राशि :--इस राशि के व्यक्ति को मोती कभी भी धारण नहीं करना चाहिए. यह शुभ फलदायक नहीं है.

♦मिथुन राशि :--इस राशि के व्यक्ति को विशेष परिस्थितियों में मोती धारण करना लाभदायक हो सकताहै. चन्द्रमा की दशा में मोती धारण करे तो उन्हें आर्थिक लाभ हो सकता है. मिथुन के लिए चन्द्रमा अशुभ भी है. इसे किसी ज्योतिषी से परामर्श करके धारण करें.

♦कर्क राशि :-इस राशि के व्यक्ति के लिए मोती अति शुभ कारक रहेगा. मोती धारण करने से स्वास्थ्य तथा आर्थिक पहलू पर नियंत्रण रहेगा. इनके जीवन में विनम्रता बनाए रखने में सक्षम होगा. आर्थिक दृष्टिकोण से लाभकारी होगा.

♦सिंह राशि :--इस राशि का व्यक्ति मोती धारण कर सकताहै. आंखों के रोगों को दूर करेगा. रक्त सम्बंधित रोगों को दूर करेगा. धन में वृद्धि करेगा. पिता को मानसिक शान्ति प्रदान करेगा. नींद अच्छी आएगी. पुत्र को मृत्यु से बचायेगा.

♦कन्या राशि :--इस राशि व्यक्ति यदि मोती धारण करे तो आर्थिक लाभ, यश प्राप्ति, सन्तान का सुख प्राप्त होगा. तथा कल्याणकारी साबित होगा.

♦तुला राशि :-- इस राशि के व्यक्ति के लिए मोती धारणकरना शुभ्ताथा लाभकारी भी है. मोती धारण करने से राज्य कृपा, अचानक धन प्राप्त, यश, पद-प्रतिष्ठा तथा समाज का गौरव प्राप्त होगा.

♦वृश्चिक राशि :--इस राशि वालो के लिए मोती धारण करना अति लाभकारी है. इसके प्रभाव से चमत्कारिक रूप से भाग्य में उन्नति, धार्मिक भावना प्रबल होगी. जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में वह सुख का अनुभव करेगा
♦धनु राशि :--मोती धारण करना इस राशि वालो के लिए अति अशुभ होगा. इसका कारण मोती चन्द्रमा के बल को बढ़ाएगा जी इस राशि वालो के लिए हानि कारक सिद्ध होगा.

♦मकर राशि :--इस राशि वालो के लिए अपने जीवन काल मेंमोती कभी भी धारण नहीं करना चाहिए. स्वास्थ्य हानितथा पति- पत्नी में वैमनस्यता बढ़ेगी.

♦कुम्भ राशि :--इस राशि के लोगों को मोती धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह धन, यश, संपत्ति को नष्ट करेगा. अचानक शत्रु बढ़ेगे.

♦मीन राशि :--इस राशि के व्यक्ति को मोती अवश्य धारणकरना चाहिए वह उसे सदैव यश प्रदान करेगा. बुद्धि लाभ, भाग्य उदय, विद्या की प्राप्ति, पुत्र के सुख की प्राप्ति व अन्य चमत्कारी लाभ देगा

🔶♦माणिक्य रत्न♦🔶
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🔶माणिक्य (रूबी) को बेहद मूल्यवान रत्न माना जाता है। इसे चुन्नी और लाल भी कहा जाता है। माणिक्य का रंग लाल होता है। इसे धारण करने से सूर्य की पीड़ा शांत होती है। माणिक्य (Manikya) को अंग्रेज़ी में 'रूबी' (Ruby Gemstone) कहतेहैं।

♦माणिक्य के तथ्य
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▶* माणिक्य रत्न के बारे में कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति के साथ कुछ अनहोनी घटित होने वाली होतो यह रत्न स्वयं अपना रंग परिवर्तित कर लेता है।

▶* कई लोग मानते हैं कि माणिक्य विष के प्रभाव कोभी कम कर देता है।

🔶माणिक्य के लिए राशि
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▶सिंह राशि के जातकों के लिए माणिक्य रत्न धारण करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।

♦माणिक्य के फायदे
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💢* जो जातक, सूर्य की पीड़ा से ग्रस्त हो उन्हें माणिक्य धारण करने की सलाह दी जाती है।

💢* इसे धारण करने से मनुष्य बदनामी से बचा जा सकता है।

💢* इसे धारण करने से विवाहित जीवन में मजबूती आती है।

🔶स्वास्थ्य में माणिक्य का लाभ
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▶माणिक्य नेत्र रोग तथा हृदय संबंधित रोगों में विशेष लाभकारी माना जाता है। साथ ही सरदर्द आदि समस्याओं में भी इसका प्रयोग लाभकारी होता है।

🔶कैसे करें माणिक्य धारण
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💢ज्योतिषानुसार माणिक्य (रूबी) रविवार के दिन सूर्य मंत्रों का जाप करते हुए धारण करना चाहिए।

💢माणिक्य धारण करते समय कुंडली में सूर्य की स्थिति के बारे में भी विचार कर लेना चाहिए।

♦🔶माणिक्य का उपरत्न
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💢♦माणिक्य के स्थान पर कई बार ज्योतिषी गार्नेट (Red garnet) भी धारण करने की सलाह देते हैं।

😊🙏🏻शुभ रात्रि मित्रो🌺🌹ं

सूर्य उच्च है या नीच

🌞जिन जातको का सूर्य नीच होता है वो हमेशा ही परेशान रेहते है उनको सरकारी कामो में दिक्कत का सामना करना पड़ता है समाज में नाम ख़राब होना । काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है
सूर्य उच्च है या नीच🌹
उसके लिये बच्चों के लक्षणों को पहचाने जिस भी बच्चे का सूर्य नीच होगा वो बात बात पर झूठ बोलता है उसकी हरकते गलत होती है । जेसे घर से बिना माता पिता को बताये धन निकालने और पकड़े जाने पर झूठ बोलना सूर्य नीच की निशानी है । नमकीन भोजन का ज्यादा पसन्द करना मिठा कम खाना गलत बच्चों की संगत में ज्यादा खेलना माता पिता की बात ना मानना । पढ़ाई में मन ना लगाना हमेशा काम बिगाड़ना माता पिता की या खानदान की इज्जत की परवाह ना करना । बात बात पर परिवार या बाहर वालो के खिलाफ माता पिता के कान भरते है और झगड़े करवाते है।
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🌞और जिन बच्चों के सूर्य उच्च काे होता है वो हमेशा अपने इरादे पर अटल रहते है झूठ बिलकुल नही बोलते । अपनी गलती भी स्वीकार लेते है और दृढ़ता से सबको जवाब देते है खेल कूद में भी आगे रेह्ते है हमेशा पढ़ाई में अपना मन लगाते है । गलत बच्चों की संगत से अपने आपको दूर रखते है और गलत बच्चों के बारे में माता पिता को बता देते है। यानि गलती बर्दास्त नही करते । माता पिता की इज्जत का हमेशा ख्याल रखते है । और घर के बुजुर्गो का भी सम्मान करते है ।
🌞�सूर्य ख़राब हो तो बच्चे को 43 दिन तक मीठा भोजन दे हर रविवार को गुड़ गेहू या ताम्बे का दान बच्चे के हाथो से करवाये आपको अपने बच्चों की समस्याओ से झुटकरा मिल जायेगा ।

ज्योतिष द्वारा चोरी गयी वस्तू का ज्ञान

ज्योतिष द्वारा चोरी गयी वस्तू का ज्ञान ...

कभी -कभी घरों में छोटी मोटी  चोरी की घटना घट जाती है। तब  एक छट -पटाहट  सी रहती है ,चोर कौन हो सकता है। ज्योतिष द्वारा इसका सटीक पता  प्रश्न  कुंडली से लगाया जाता है।

जब भी चोरी का पता लगता है उस समय को नोट कर लीजिये। अगर किसी को जन्मकुंडली देखने का ज्ञान है तो ठीक है नहीं तो किसी भी ज्योतिष के पास समय को बता कर समस्या का समाधान किया जा सकता है।

 चोरी होने की सूचना मिलते ही  तुरंत प्रश्न कुंडली बनायें।

मेष या वृषभ लग्न ----पूर्व दिशा 

मिथुन लग्न         ----- अग्नि कोण 

कर्क लग्न             ---- दक्षिण 

 सिंह लग्न ------------ नैरित्य कोण 

कन्या लग्न --------- उत्तर दिशा 

 तुला और वृश्चिक लग्न -- पश्चिम दिशा 

धनु लग्न ------------ वायव्य कोण 

 मकर और कुम्भ लग्न ---उत्तर दिशा 

मीन लग्न ------------इशान कोण 

उपरोक्त लग्नो में खोयी वस्तु ,उसके दिखाए गए लग्नो के सामने की दिशा में गयी है।

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अब सवाल उठता है चोरी करने वाला कौन हो सकता है तो नीचे लिखे लग्नो के आधार पर पता लगाया जा सकता है।

मेष लग्न ---ब्राह्मण या सम्मानीय भद्र पुरुष 

वृषभ लग्न--क्षत्रिय 

मिथुन लग्न -----वेश्य 

कर्क लग्न -------शुद्र या सेवक वर्ग 

सिंह लग्न ------स्वजन या आत्मीय व्यक्ति 

कन्या लग्न---- कुलीन स्त्री ,घर की बहू  -बेटी  या बहन 

तुला लग्न ----पुत्र ,भाई या जमाता 

वृश्चिक लग्न-- इतर जाति का व्यक्ति 

धनु लग्न ---स्त्री 

मकर लग्न ---वेश्य या व्यापारी 

कुम्भ लग्न---चूहा 

मीन लग्न----खोयी घर में ही पड़ी है कहीं ( मिस-प्लेस )

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यह सब जानने  के बाद यह भी प्रश्न उठता है , जो सामान चोरी हुआ है वह मिलेगा या नहीं ? इसके लिए प्रश्न कुंडली में चंद्रमा की स्थिति देखी  जाती है। यहाँ पर चंद्रमा को मालिक और  सातवें  भाव को चोर माना जाता है।चौथे भाव को धन -प्राप्ति  की जगह और लग्न -भाव को चोरी गया सामान माना जाता है।

1) लग्न -भाव का स्वामी अगर सातवें घर या उसके स्वामी के साथ हो तो कोशिश करने पर चोरी गया धन मिल जाता है।

2)अगर लग्न -भाव का स्वामी अष्ठम में हो तो चोर खुद ही चोरी की गयी वस्तु  लौटा देगा।लेकिन ग्रह  अस्त होगा तो चोरी का पता चलेगा पर वस्तु नहीं मिलेगी।

3)लग्न-भाव का स्वामी दसवें घर के स्वानी के साथ है तो चोर माल सहित पकड़ा जायेगा।

4) अगर लग्नेश की दृष्टि दसवें घर के स्वामी पर नहीं पद रही हो तो चोरी गयी वस्तु नहीं मिलेगी।

5)अगर सातवें घर का स्वामी सूर्य के साथ अस्त हो तो बहुत समय बाद चोर का तो पता चल जायेगा पर वास्तु नहीं मिलेगी।

6)अगर सप्तमेश और लग्नेश साथ में हो तो चोर  राज भय से डर  कर खुद ही माल को दे देता है।

7)अगर  सप्तमेश  पर लग्नेश की दृष्टि ना पड़  रही हो तो ना चोर को लाभ लाभ होता है ना मालिक को ,माल को     मध्यस्थ ही  हड़प लेता है।

8)प्रश्न कुंडली में अष्ठम भाव चोर के धन रखने का स्थान होता है इसलिए अगर धन भाव  का  स्वामी अष्ठम में ही बैठा हो तो माल नहीं मिलेगा।और अगर धन भाव का स्वामी सप्तम में हो तो भी माल नहीं मिलता क्यूँ कि "चंद्रास्वामी चोर सप्तम "  के अनुसार  सप्तम भाव स्वयं  चोर है।

9) धनेश अगर अष्टमेश के साथ हो तो धन मिल जाता है।

10) अगर अष्टमेश ,दशमेश के साथ हो तो राज-पुरुष चोर का पक्षपाती ही माल नहीं मिलेगा।

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अब चोरी हुई वस्तु कहाँ छिपाई गयी है इस पर विचार करते हैं।

1) लग्नेश और सप्तमेश  का आपस में परिवर्तन  या दोनों एक ही भाव में हो तो वस्तु घर में ही कहीं छुपी या छुपाई गयी है।

2) चंद्रमा अगर लग्न में हो तो वस्तु  पूर्व दिशा में होगी और अगर सप्तम में हो तो वस्तु पश्चिम में मिलेगी।चंद्रमा अगर दशम ने हो तो दक्षिण और चतुर्थ में हो तो वस्तु  उत्तर दिशा में मिलेगी।

3) अगर लग्न में अग्नितत्व राशि ( मेष ,सिंह ,धनु ) हो तो वस्तु घर के पूर्व,अग्नि -स्थान , रसोई घर में ही मिल जाती है।

4 ) लग्न में अगर पृथ्वी -तत्व राशि ( वृषभ ,कन्या ,मकर ) हो तो वस्तु दक्षिण दिशा में भूमि में दबी मिलेगी।

5 ) अगर लग्न में वायु -तत्व राशि  ( मिथुन ,तुला कुम्भ ) हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में हवा में लटकाई गयी है।

6 )लग्न में जल-तत्व राशि ( कर्क ,वृश्चिक ,कुम्भ )  हो तो वस्तु जलाशय के पास या उसके आस-पास उत्तर दिशा में मिलेगी।

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ग्रहों के हिसाब से चोर कौन है और कितनी उम्र का है ये भी पता लगाने की कोशिश करते हैं।

1) प्रश्न -कुंडली में यदि लग्न पर सूर्य-चन्द्र दोनों की दृष्टि पड़ रही हो तो वस्तु  किसी घर के व्यक्ति ने ही चुराई है।और यदि लग्नेश ,सप्तमेश से युक्त हो कर लग्न में हो तो भी चोरी किसी घर के व्यक्ति ने ही की है।

2)लग्न पर सूर्य या चन्द्र किसी एक ही की दृष्टि पड़ रही हो तो वस्तु किसी आस पास रहने वाले व्यक्ति ने चुराई है।

3)अगर सप्तमेश द्वादश या तृतीय स्थान में हो तो घर के नौकर ने चोरी की है।

4 )अगर सप्तमेश स्वग्रही या अपनी उच्च राशि में हो तो चोरी पेशेवर चोर ने की है। यहाँ पर चोर की शक्ति का ज्ञान लग्न,सप्तम और दशम भाव के बल के अनुसार करना चाहिए।

5) प्रश्न -कुंडली में अगर सूर्य बलवान हो तो पिता या पितातुल्य व्यक्ति ,चंद्रमा बलि हो तो माँ या मातातुल्य  महिला ,शुक्र बली हो तो महिला ,वृहस्पति बलि हो तो घर के मालिक ने ,शनि बलि हो तो पुत्र ने और मंगल बलि हो तो भाई या सगा भतीजा तथा बुध बलवान हो तो मित्र या मित्र -सम्बन्धियों ने चोरी की है।

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लग्न में अगर शुक्र ----युवक 

                      बुध ---बालक 

                    गुरु -----वृद्ध 

                   मंगल--युवक 

                 शनि -वृद्ध चोर है।

लग्न और दशम भाव के मध्य सूर्य है तो चोर बालक है। दशम भाव और सप्तम भाव के मध्य  सूर्य हो तो चोर युवक है। लग्न और चतुर्थ भाव के मध्य सूर्य हो तो चोर अत्यंत वृद्ध है।

कोर्ट केस और ज्योतिष

कोर्ट केस और ज्योतिष

अक्सर मनुष्य को अपने कारणो से न्याय के लिये जाना पडता है,न्याय भी प्रकृति के अनुसार ही मिलता है,अगर किसी को न्यायालय न्याय नही दे पाता है तो प्रकृति अपने द्वारा उसे सजा देती है,लेकिन किसी प्रकार का छल या फ़रेब करने के बाद न्याय ले लिया जावे तो वह न्याय नही बेईमानी कही जाती है,प्रकृति ने न्याय के लिये जिन कारकों को नियुक्त किया है वे इस प्रकार से हैं

लगन वादी है

कुन्डली या प्रश्न कुन्डली में लगन वादी होती है और वह वाद कुन्डली में लगनेश के स्थान से पता किया जाता है,लगनेश पर कब खराब या अच्छे ग्रह फ़रक डाल रहे होते है,जो ग्रह अपने असर से खराब असर देता है वही कारण न्यायालय में जाने का होता है।

सप्तम स्थान प्रतिवादी का है

लगन से या प्रश्न कुन्डली से सप्तम स्थान प्रतिवादी का होता है,अगर सप्तमेश किसी प्रकार से शक्तिशाली होता है तो प्रतिवादी की जीत होती है,और कमजोर रहने पर वह हार जाता है और वादी की जीत हो जाती है,सप्तमेश का असर जिन जिन राशियों या ग्रहों पर होता है वहीं पर प्रतिवादी अपना खराब असर देता है।

शनि केतु दोनो मिलकर वकील बनते है

न्यायालय में जाने के लिये वकील की जरूरत पडती है,शनि और केतु अगर अगर माफ़िक है तो वकील ठीक मिलता है,और शनि केतु ठीक नही है तो वकील भी परेशान करते है।

शनि न्यायालय का रूप बताता है

जन्म कुन्डली या प्रश्न कुन्डली से शनि का स्थान देखकर ही पता किया जाता है कि न्यायालय का क्षेत्र कैसा है,उच्च न्यायालय के लिये शनि की उच्चता और नीचे के न्यायालयों के लिये शनि के निम्न भावों में स्थिति देखकर पता किया जाता है।

जज गुरु होता है

जन्म कुन्डली की या प्रश्न कुन्डली की स्थिति को देखकर पता किया जाता है कि गुरु किस भाव में है और गुरु पर किस किस ग्रह का असर जा रहा है,गुरु के ऊपर जिस ग्रह की नजर होती है जज उसी प्रकार का न्याय देता है,और गुरु जिस ग्रह को अपना असर देता ग्रह को उसी प्रकार से न्याय लिखना पडता है।

शनि बुध इतिहासिक न्याय कर्ता है

कुन्डली में अगर किसी प्रकार से शनि और बुध की युति से न्याय लिखा जाता है तो वह इतिहासिक न्याय कहा जाता है,और उस न्याय के द्वारा अन्य लोगों को न्याय देने के लिये वकील या जज उस दिये गये न्याय का हवाला अदालत में देते हैं।

न्याय मिलने की अवधि शनि तय करता है

कर्म और फ़ल का दाता शनि न्याय के समय को निश्चित करता है,राहु वादी प्रतिवादी को भ्रमित करने के बाद न्यायालय में घुमाते रहते है,और वकील के लिये कमाई का साधन राहु ही करवाता है।

राहु का कार्य दो को लडाकर दूर बैठकर तमाशा देखना है

दो व्यक्तियों को चुगली के द्वारा या अन्य कारण से राहु भ्रम में डाल देता है,उन भ्रमों के कारण दोनो एक दूसरे से पूंछे बिना ही या किसी प्रकार की राहु की हरकत से ग्रसित होकर एक दूसरे के जान के दुश्मन बन जाते है,और कोर्ट केश या थाने अदालत के चक्कर लगा लगा कर बरबाद हुआ करते है।

शनि राहु की युति और मंगल की द्रिष्टि जेलखाना है

कुन्डली में शनि राहु की युति को अगर मंगल देखता है तो जेलखाना या नजरबंदी कहा जाता है,लेकिन किसी प्रकार की गुरु या सूर्य की युति जेलखाने के भाव को बदल कर रेलगाडी या वाहन की चलती फ़िरती केटरिंग में बद्ल देते है,यह भाव किसी प्रकार से केतु की उच्चता में गाडियों की रिपेयरिंग का स्थान भी बन जाता है।

द्वितीयेश धन तृतीयेश चैक षष्ठेश बैंक है

दूसरे भाव का मालिक नगद धन का मालिक है तीसरे भाव का मालिक चैक है और छठे भाव का मालिक बैंक है,तीसरे भाव को अगर अच्छा ग्रह देख रहा है तो चैक पास हो जाता है,और अगर कोई गलत ग्रह देख रहा है तो वह चैक अनादरित हो जाता है,उसी प्रकार से दूसरे भाव का मालिक अगर कमजोर है तो बैंक में धन नही है और चैक के द्वारा गलत तरीके से भुगतान किया जा रहा है,तीसरे भाव को राहु के देखने पर झूठा चैक दिया जा रहा है।

नवें भाव का राहु प्रतिवादी को झूठ बुलवाता है

नवां भाव प्रतिवादी के लिये तीसरा भाव बन जाता है,और राहु की सिफ़्त झूठ बोलने की होती है,इसलिये प्रतिवादी के अन्दर झूठ बोलने की कला आ जाती है,लेकिन गुरु अगर राहु के साथ है तो गुरुचान्डाल योग बनने से जज को झूठी बात पर भी यकीन हो जाता है और फ़ैसले में झूठे व्यक्ति का फ़ायदा हो जाता है,लेकिन राहु के गोचर में मंगल के साथ पहुंचते ही झूठ से पर्दा उठ जाता है,तथा झूठे तरीके से जीते गये केश का असर अचानक मौत या किसी प्रकार के भयंकर हादसे के रूप में सामने आता है,अथवा झूठी बात या गवाही देने वाले के लिये किसी न मिटने वाली बीमारी के पैदा होने के कारण उसे पूरी सजा जो मिलनी थी वह मिलती है,तथा जो नुकसान झूठी बात या गवाही देने के कारण वादी को हुआ था उसे किसी अन्य मद के जरिये उसकी क्षति पूर्ति हो जाती है,यही प्रकृति का न्याय बोला है,और जज को हर फ़ैसले में Natural Law के बारे में सोचना पडता है।